रात के अंधेरे में जो निकले थे वो आँसू,
क्यूँ अब उन्हें सबसे छुपाने का दिल करता है?
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
जिस भीड में चले थे नाम कमाने,
क्यूँ उसी भीड में खो जाने का मन करता है,
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
कहाँ गई वो मासूमियत? कहाँ गई वो हँसी?
कहाँ गया वो बसता? वो सैर-सपाटे की मस्ती?
क्यूँ मीठी लोरियाँ अब सुला नहीं पातीं?
क्यूँ मिथ्या लगती है परियों की कहानी?
क्यूँ उस बेपरवाह जिंदगी को सोचते ही जी ललचाता है?
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
वो बचपन भी क्या बचपन था!
जब हसी-ठिठोलों में मन झूमता था!
जब मिट्टी से सने जूतों और बर्फ के गोलों में,
दिन भली-भाँति बीतता था।
उन दिनों को याद कर,
आँखे मूंद के भी आंसुओं का सैलाब आ जाता है।
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
कब अभिमान ने स्वार्थ का रूप धारण किया?
कब लंच बांटते- बांटते हमने रूप-रंग में विभाजन शुरू किया?
कब डर कर माँ के आँचल में छुप जाने से माँ से ही अपने डर छुपा लिए?
कब कट्टी-मीठी करते-करते उन जाने-पहचाने चेहरों को भी भुला गए?
अरे उन भूले हुए दोस्तों के चुटकुलों पर अब भी ठहाके लगाने को दिल करता है।
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
बचपन तू बस अब लौट आ!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
क्यूँ अब उन्हें सबसे छुपाने का दिल करता है?
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
जिस भीड में चले थे नाम कमाने,
क्यूँ उसी भीड में खो जाने का मन करता है,
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
कहाँ गई वो मासूमियत? कहाँ गई वो हँसी?
कहाँ गया वो बसता? वो सैर-सपाटे की मस्ती?
क्यूँ मीठी लोरियाँ अब सुला नहीं पातीं?
क्यूँ मिथ्या लगती है परियों की कहानी?
क्यूँ उस बेपरवाह जिंदगी को सोचते ही जी ललचाता है?
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
वो बचपन भी क्या बचपन था!
जब हसी-ठिठोलों में मन झूमता था!
जब मिट्टी से सने जूतों और बर्फ के गोलों में,
दिन भली-भाँति बीतता था।
उन दिनों को याद कर,
आँखे मूंद के भी आंसुओं का सैलाब आ जाता है।
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
कब अभिमान ने स्वार्थ का रूप धारण किया?
कब लंच बांटते- बांटते हमने रूप-रंग में विभाजन शुरू किया?
कब डर कर माँ के आँचल में छुप जाने से माँ से ही अपने डर छुपा लिए?
कब कट्टी-मीठी करते-करते उन जाने-पहचाने चेहरों को भी भुला गए?
अरे उन भूले हुए दोस्तों के चुटकुलों पर अब भी ठहाके लगाने को दिल करता है।
बचपन तू फिर से लौट आ ना!
तुझसे मिलने का दिल करता है।
बचपन तू बस अब लौट आ!
तुझसे मिलने का दिल करता है।